बालाघाट की सुनीता सिहोरे के बीज बैंक में बीज देने के साथ उनकी वापसी का भी नियम है। किसान देशी बीज बिना शुरुआती भुगतान के लेते हैं। फसल आने पर जितनी मात्रा ली थी, उसकी दोगुनी मात्रा जमा करनी होती है, ताकि अगला किसान भी बीज पा सके। 14 मई 2026 की सरकारी रिपोर्ट में सुनीता ने इस व्यवस्था का विवरण दिया।

संग्रह में करीब सत्तर तरह के बीज

सुनीता आजीविका मिशन की बीज सखी हैं। उनके अनुसार, संग्रह में लगभग 70 प्रकार के देशी बीज थे, जिनमें सब्जियों, अनाज और दलहन के बीज शामिल हैं। फसल के बाद लौटाए गए बीज अगले किसानों को दिए जा सकते हैं।

संरक्षण का अनुभव दूसरों तक

बीज सखियाँ कृषि सखियों में से प्रशिक्षण देकर तैयार की गईं। इस प्रशिक्षण में डिंडोरी की फुलझरिया बाई ने भी बीज संरक्षण के तरीके बताए। मई की रिपोर्ट उन्हें पिछले 16 वर्षों से देशी बीज सँभालने वाली महिला के रूप में परिचित कराती है। सतना के बाबूलाल दहिया, कृषि और उद्यानिकी विभाग के प्रशिक्षकों तथा कर्नाटक की बी.बी. जान का योगदान भी दर्ज है।

रिपोर्ट की तारीख तक मध्यप्रदेश में 454 बीज सखियों को प्रशिक्षण देने और 29 जिलों में 99 बीज बैंक स्थापित करने का आँकड़ा था। इनमें दस बैंक बालाघाट में बताए गए। यह प्रदेश का ढाँचा है; सुनीता का संग्रह उसमें किसान को बीज देने और वापस लेने का एक ठोस स्थानीय उदाहरण है।

मई की सूचना में आने वाले खरीफ मौसम के लिए विकासखंड के ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से बीज सखियों की सूची लेने का रास्ता बताया गया था। यह संपर्क और संग्रह की जानकारी पाने की उस समय दी गई व्यवस्था थी।

मुख्य बातें

  • सुनीता सिहोरे के संग्रह में सब्जी, अनाज और दलहन समेत करीब 70 प्रकार के देशी बीज दर्ज हैं।
  • उनकी बताई व्यवस्था में किसान बिना शुरुआती भुगतान के बीज लेते हैं और उत्पादन के बाद दोगुनी मात्रा लौटाते हैं।
  • डिंडोरी की फुलझरिया बाई ने बीज सखियों को अपने संरक्षण अनुभव से प्रशिक्षण दिया।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग · परंपरागत बीजों के संरक्षण में आजीविका मिशन की अनूठी पहल ↗14 मई 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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