गरमागरम फड़ नहीं है। फड़ कागज़ बेचती है। यह कमरा सिलेंडर का है। 3 जून। बुधवार। जगह: सप्रे संग्रहालय, भोपाल। नाम: हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव। उपनाम शीट का: पुरखों को प्रणाम। काम: पोस्टर प्रदर्शनी।
बोलने वाले राज्यपाल श्री पटेल। वाक्य: प्रारंभिक काल चुनौतीपूर्ण; कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की कठिनाईयों के बावजूद आदर्श और शुचिता रखी। युवा पीढ़ी उसी परंपरा से प्रेरणा ले—आह्वान, नामावली नहीं। साथ: डॉ. कोठारी।
जो किताब मशीन से निकली
लोकार्पण: ‘पीर पराई जाने रे’। विषय: राज्यपाल का जीवन। लेखन: श्रीमती शिल्पी दिवाकर, लोकभवन कंट्रोलर। मुद्रण-प्रकाशन: सप्रे संग्रहालय। गरमागरम इसे मशीन-रूम की शीट लिखती है, स्टॉल की गड्डी नहीं। हिन्दी भवन ने 200 वर्ष पूर्ण होने का विशेषांक भेंट किया।
महापौर श्रीमती राय: भारत में पत्रकारिता का इतिहास प्राचीन। श्री श्रीवास्तव: बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता की चुनौती—विचार, सर्वे नहीं। अभिनंदन: श्री विजयदत्त श्रीधर, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह। आभार: डॉ. मंगला। मौजूद: लोकभवन अधिकारी, सेवानिवृत्त अपर संचालक श्री सुरेश गुप्ता, पत्रकार, साहित्य प्रेमी—गिनती शीट नहीं देती। चित्र समारोह का फ्रेम है।
मुख्य बातें
- पोस्टर प्रदर्शनी सप्रे संग्रहालय की पंक्ति है, पूरे प्रदेश के अखबारघर की सूची नहीं।
- ‘पीर पराई जाने रे’ उसी दिन का मुद्रण-लोकार्पण है, बिक्री आँकड़ा नहीं।
- 200 वर्ष विशेषांक हिन्दी भवन की भेंट है, संस्थान का कैटलॉग नहीं।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।



